Root rides again in moment of crisis as England pay the price for optics
इंग्लैंड क्रिकेट में एक अनचाही वापसी
पुरानी कहावत है कि कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। जो रूट ने कभी नहीं चाहा होगा कि वह अपने 64 टेस्ट मैचों के कप्तानी के उन कठिन दिनों को दोबारा जिएं। लेकिन, एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में, ईसीबी (ECB) ने जिस तरह से स्थिति को संभाला है, उससे यह स्पष्ट है कि जो रूट को एक बार फिर से ‘अंतरिम’ कप्तान की भूमिका में लौटना पड़ा है।
संकट का असली कारण: ऑप्टिक्स की राजनीति
Root rides again in moment of crisis as England pay the price for optics, यह शीर्षक केवल एक बयान नहीं है, बल्कि इंग्लैंड क्रिकेट में व्याप्त उस दिखावे की संस्कृति को दर्शाता है जो हालिया घटनाओं का कारण बनी। बेन स्टोक्स और गस एटकिंसन के रात के कर्फ्यू उल्लंघन ने टीम को एक बड़े संकट में डाल दिया है। ईसीबी का ध्यान तथ्यों से अधिक इस बात पर रहा कि बाहर की दुनिया में टीम की छवि कैसी दिखेगी।
स्टोक्स का करियर, जो 2017 की ब्रिस्टल की घटना से प्रभावित रहा है, अब फिर से उसी तरह के सवालों के घेरे में है। हालांकि, चेल्सी के रेक्स रूम्स में उनका समय बिताना, उस पुराने समय की घटनाओं से तुलना करने लायक बिल्कुल नहीं था। फिर भी, बोर्ड की ‘ऑप्टिक्स’ के प्रति संवेदनशीलता ने स्थिति को और अधिक बिगाड़ दिया है।
जो रूट: टीम के लिए एक पुराना साथी
हैरी ब्रुक को कप्तान बनाने की चर्चा भी चली, लेकिन यह निर्णय टीम में और अधिक विरोधाभास पैदा कर सकता था। ऐसे में जो रूट का आगे आना, भले ही वह अनिच्छा से हो, इंग्लैंड की टीम के लिए एक ढाल का काम कर रहा है। रूट ने अपनी पिछली कप्तानी के दौरान कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। 2018 में भारत के खिलाफ 4-1 की ऐतिहासिक जीत उनके खाते में रही, लेकिन उसके बाद कोविड के कठिन समय में टीम का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा।
ईसीबी और नेतृत्व का भविष्य
यह स्थिति माइक एथर्टन के 2001 के दौर की याद दिलाती है, जब कोई और जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं था। टीम के वरिष्ठ खिलाड़ी एक बार फिर से मोर्चा संभाल रहे हैं, जबकि प्रबंधन केवल अपनी छवि को बचाने में व्यस्त दिख रहा है। स्टोक्स के लिए यह समय कठिन है, लेकिन रूट की मौजूदगी उन्हें अपनी मानसिक शांति और प्राथमिकताओं को व्यवस्थित करने का जरूरी समय दे रही है।
- क्या रूट की वापसी दीर्घकालिक है? फिलहाल इसे केवल ‘अंतरिम’ कहा गया है।
- स्टोक्स का भविष्य: स्टोक्स को अपने करियर की प्राथमिकताओं पर फिर से विचार करना होगा।
- प्रबंधन की भूमिका: ईसीबी को ‘दिखावे’ से आगे बढ़कर क्रिकेट के वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
अंत में, यह इंग्लैंड के टेस्ट क्रिकेट इतिहास का एक और कठिन मोड़ है। जो रूट का फिर से कप्तान बनना इस बात का प्रमाण है कि जब भी संकट आता है, टीम को बचाने के लिए वही अनुभवी चेहरे काम आते हैं जिन्हें बोर्ड ने पहले दरकिनार कर दिया था। क्या यह इंग्लैंड के इस महान खिलाड़ी के लिए एक नया अवसर साबित होगा, या यह केवल एक अस्थायी मरहम है? इसका जवाब आने वाले टेस्ट मैचों में ही मिलेगा।