विराट कोहली ने बताया: टेस्ट क्रिकेट में भारत की सफलता का वो की फैक्टर जो कोई नहीं जानता
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विराट कोहली ने खुलासा: भारत के टेस्ट गोल्डन एरा का असली फॉर्मूला था दोस्ताना ड्रेसिंग रूम
विराट कोहली का टेस्ट क्रिकेट से संन्यास अब तय है, लेकिन उनकी कप्तानी के दिन अभी भी भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के दिलों में जिंदा हैं। आईपीएल 2026 के बीच, जहां कोहली रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (आरसीबी) के लिए शानदार बल्लेबाजी कर रहे हैं, उन्होंने एक बार फिर अपने टेस्ट कप्तानी के दौर को याद किया। इस बार, आरसीबी पॉडकास्ट पर उनके शब्दों ने भारत के उस गोल्डन टेस्ट एरा का राज़ खोला जिसने विश्व क्रिकेट में हलचल मचाई।
एक ऐसी टीम, जहां हर कोई था जिम्मेदार
कोहली ने भावुक होते हुए कहा, “मैं उन समय को देख रहा था जब मैं टेस्ट क्रिकेट खेल पाने का मौका पाया, लंबे समय तक भारत का नेतृत्व किया, कुछ अद्भुत जीतें हासिल कीं और हमारे टेस्ट क्रिकेट की यात्रा में एक सुनहरा दौर देखा। ये एक ऐसा समूह था जो हमेशा भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहता था — उनके लिए ये जीवन का अवसर था।”
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि टीम की सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण खिलाड़ियों के बीच मजबूत बंधन था। चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्या रहाणे, रविचंद्रन अश्विन, इशांत शर्मा, मोहम्मद शमी और रविंद्र जडेजा — इन सभी की उम्र लगभग एक समान थी। इसका मतलब था कि ड्रेसिंग रूम में कोई बड़ा-छोटा का भेद नहीं था।
कप्तानी से ज्यादा ताकतवर थी टीम की जिम्मेदारी
कोहली ने बताया, “हम एक दूसरे के दोस्त की तरह थे। मैं कप्तान था, मैनेजमेंट निर्देश दे रहा था, लेकिन सबसे बड़ी बात थी कि समूह की औसत उम्र के कारण हर कोई यह महसूस करता था कि उसकी जिम्मेदारी है।”
हर खिलाड़ी ने स्वयं से पूछना शुरू कर दिया कि वह टीम को और बेहतर कैसे बना सकता है। यही मानसिकता धीरे-धीरे भारत को घरेलू मैदानों पर नहीं, बल्कि विदेशों में भी खतरनाक बना दिया।
- 2018-19 में ऑस्ट्रेलिया में पहली बार टेस्ट सीरीज जीत
- एशियाई कप्तान के रूप में सबसे ज्यादा विदेशी टेस्ट जीत
- साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड में ऐतिहासिक जीत
- फिटनेस पर अटूट फोकस, जिसने टीम की संस्कृति बदल दी
कोहली का क्रांतिकारी दृष्टिकोण
कोहली के नेतृत्व में भारत ने क्रिकेट के सबसे कठिन परिस्थितियों में भी आक्रामक खेलना शुरू किया। उनकी मानसिकता ने टीम की पहचान बदल दी। क्रिकेट के किसी भी मैदान पर अब भारत एक डरावना प्रतिद्वंद्वी बन गया था।
“यह नहीं था कि वो लोग टीम की जिम्मेदारी संभालेंगे और हमें कुछ नहीं करना है,” कोहली ने कहा। “हम यह महसूस कर रहे थे कि हम युवा हैं, अगले छह-सात-आठ सालों के लिए टीम बनाना चाहते हैं। फिर सवाल उठने लगा — मैं टीम को और बेहतर कैसे बना सकता हूं?”
यही भावना, यही लगाव और यही कल्चर वो था जिसने भारतीय टेस्ट क्रिकेट को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया।
आज जब वो आरसीबी के लिए 400 से ज्यादा रन बना चुके हैं और 2027 के वनडे विश्व कप के लिए भी लक्ष्य रखे हैं, तो ये पल उनके करियर के सबसे यादगार पलों में से एक बन जाते हैं।