विराट कोहली के ओडीआई भविष्य पर आर अश्विन का बड़ा बयान: ‘उसे कुछ साबित करने की जरूरत नहीं’
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विराट कोहली के ओडीआई भविष्य पर आर अश्विन का बड़ा बयान
विराट कोहली के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं पर अब पूर्व भारतीय स्पिनर आर अश्विन ने भी अपनी राय दी है। अश्विन ने स्पष्ट किया कि कोहली जैसे खिलाड़ी को अपने करियर के इस पड़ाव पर कुछ साबित करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने तो यहां तक कहा कि अब उनकी लड़ाई आलोचकों से नहीं, बल्कि सिर्फ खुद से है।
“उसे कुछ साबित करने की जरूरत नहीं”
विराट कोहली ने हाल ही में आरसीबी पॉडकास्ट में कहा था कि वह 2027 के एकदिवसीय विश्व कप में खेलना चाहते हैं। इस टूर्नामेंट का आयोजन दक्षिण अफ्रीका, ज़िम्बाब्वे और नामीबिया में होना है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अश्विन ने कहा, “विराट ने कहा कि उसे कुछ साबित करने की जरूरत नहीं है। वह सही कह रहे हैं। मुझे भी ऐसा ही लगता है। उसके लिए कुछ भी बचा नहीं है जो साबित करना हो। इतने साल तक खेलने और इतने मैच जीतने के बाद, वह क्यों साबित करे?”
उम्र के साथ बदलती है लड़ाई
अश्विन ने आगे कहा कि जब खिलाड़ी युवा होते हैं, तो उनके लिए आलोचकों को गलत साबित करना एक मोटिवेशन का स्रोत होता है। लेकिन उम्र और परिपक्वता के साथ उनकी लड़ाई बदल जाती है।
उन्होंने कहा, “जो लोग बाहर बैठे हैं, उनके पास राय देने का अधिकार है—यह उनका काम है। लेकिन समय के साथ खिलाड़ी समझ जाता है कि अब उसका मुकाबला खुद से है, दूसरों से नहीं। कोहली इस स्तर पर पहुंच चुके हैं।”
चयनकर्ताओं पर भी नजर
इससे पहले, भारतीय चयन समिति के प्रमुख ने कहा था कि रोहित शर्मा और विराट कोहली दोनों ने 2027 विश्व कप को लेकर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। इस बयान के बाद से दोनों खिलाड़ियों ने फिटनेस पर विशेष ध्यान दिया है और क्लब क्रिकेट में लगातार रन बनाए हैं।
कोहली ने भी पॉडकास्ट में कहा कि वह ईमानदारी से तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह एक आशीर्वाद है कि मैं इस खेल को खेल सकता हूं। जमीन पर आकर दूसरों से ज्यादा मेहनत करना, यह एक बहुत बड़ा सुख है। लेकिन अगर कोई मुझे बता दे कि मैं अच्छा नहीं हूं या मेरी जरूरत नहीं है, तो ठीक है। लेकिन जब तक मुझे लगता है कि मैं जरूरी हूं, मैं तैयार रहूंगा।”
प्रशंसकों का समर्थन
विराट और रोहित दोनों के प्रदर्शन और फिटनेस को देखते हुए, प्रशंसकों का रुख साफ है—वे चाहते हैं कि भारत के ये दो बड़े बल्लेबाज 2027 तक खेलते रहें। उनकी उपस्थिति न केवल टीम को अनुभव देगी, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगी।
अश्विन का बयान उनके इस रुख को और मजबूती देता है। एक पूर्व साथी के तौर पर उनकी राय न केवल मायने रखती है, बल्कि चयनकर्ताओं और प्रशासन पर भी दबाव डालती है कि वे खिलाड़ियों के योगदान को सम्मान दें।
निष्कर्ष: एक नई परिभाषा का युग
विराट कोहली के सामने अब सवाल यह नहीं है कि वह क्या कर सकते हैं, बल्कि यह है कि वह क्यों खेलना चाहते हैं। अश्विन के शब्दों में, अब लड़ाई साबित करने की नहीं, बल्कि खुद के साथ निष्ठा बनाए रखने की है।
यदि फिटनेस और फॉर्म बरकरार रहती है, तो 2027 विश्व कप में विराट कोहली का खेलना सिर्फ एक अवसर नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक पल हो सकता है।