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Sunil Gavaskar goes against IPL authority to support Rishabh Pant on ‘F’ word controversy

Nusrat Jahan · · 1 min read
rishabh pant and sunil gavaskar

ऋषभ पंत और विवाद: सुनील गावस्कर का नया नजरिया

आईपीएल क्रिकेट की दुनिया में भावनाओं का खेल है। हाल ही में जब ऋषभ पंत ने मैच के बाद हुई प्रेजेंटेशन सेरेमनी के दौरान अनजाने में ‘एफ’ शब्द (गाली) का इस्तेमाल किया, तो पूरी क्रिकेट बिरादरी हैरान रह गई थी। कमेंटेटर इयान बिशप ने तुरंत पंत की ओर से माफी मांगी ताकि खेल की गरिमा बनी रहे। हालांकि, भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर इस मामले को लेकर बिल्कुल अलग राय रखते हैं।

सुनील गावस्कर का समर्थन और आईपीएल अथॉरिटी को सुझाव

सुनील गावस्कर का मानना है कि ऋषभ पंत द्वारा इस्तेमाल किया गया शब्द केवल भावनाओं का एक आवेग था, जिसे गलत संदर्भ में नहीं लिया जाना चाहिए। गावस्कर ने अपने कॉलम में सुझाव दिया है कि आईपीएल अथॉरिटी को मैच के तुरंत बाद हारने वाली टीम के कप्तान का इंटरव्यू लेने की परंपरा पर पुनर्विचार करना चाहिए। उनका तर्क है कि एक कप्तान को अपनी हार और निराशा से उबरने के लिए थोड़ा समय मिलना चाहिए।

मैच के बाद की घबराहट और खिलाड़ियों का मानसिक दबाव

गावस्कर ने विस्तार से समझाया: “मैच खत्म होने के कुछ ही मिनटों बाद कप्तान का इंटरव्यू लेना क्या वास्तव में जरूरी है? यदि मैच आखिरी ओवर तक गया हो, तो कप्तान की निराशा और भी अधिक होती है। यदि वह कप्तान विकेटकीपर भी है, जो तपती गर्मी में लगातार विकेट के पीछे दौड़ रहा हो, तो उसका तनाव कई गुना बढ़ जाता है।” उन्होंने आगे कहा कि हारने वाले कप्तान को अपना चेहरा धोने और अपनी भावनाओं को शांत करने का मौका दिया जाना चाहिए।

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गावस्कर का प्रस्ताव: इंटरव्यू के तरीके में बदलाव

दिग्गज बल्लेबाज ने एक व्यावहारिक समाधान पेश किया है। उनका सुझाव है कि प्रेजेंटेशन के दौरान पहले विजेता टीम के ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ से बात की जानी चाहिए, ताकि हारने वाले कप्तान को थोड़ा समय मिल सके। इससे न केवल ऐसी अप्रिय घटनाओं से बचा जा सकेगा, बल्कि कप्तान अपनी बात अधिक स्पष्टता और संयम के साथ रख पाएगा।

ऋषभ पंत: खेल का एक हंसमुख खिलाड़ी

सुनील गावस्कर ने ऋषभ पंत के व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि वे खेल के मैदान पर सबसे खुशमिजाज खिलाड़ियों में से एक हैं। वे खेल को अपने अंदाज में जीना पसंद करते हैं। गावस्कर ने लिखा, “यह तथ्य कि पंत जैसा शांत और हंसमुख खिलाड़ी भी अपना आपा खो बैठा, यह साबित करता है कि हार के तुरंत बाद माइक थमा देना सही नहीं है। उन्हें संभलने का मौका दिया जाना चाहिए।”

खेल और भावनाओं का संतुलन

यह पूरा विवाद खेल के मैदान पर खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य और उन पर पड़ने वाले दबाव को उजागर करता है। जहां खेल की गरिमा सर्वोपरि है, वहीं खिलाड़ियों की मानसिक स्थिति को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सुनील गावस्कर का यह तर्क आईपीएल अथॉरिटी के लिए एक आईना है, जो समय के साथ खेल के प्रोटोकॉल में सुधार करने का इशारा करता है।

अंततः, क्रिकेट केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह भावनाओं का भी एक केंद्र है। गावस्कर जैसे दिग्गजों का समर्थन खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी राहत हो सकता है, जो अक्सर मैच के तनावपूर्ण माहौल में गलती कर बैठते हैं। क्या आईपीएल प्रबंधन भविष्य में इस पर विचार करेगा? यह देखना दिलचस्प होगा।

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Nusrat Jahan

Nusrat Jahan is a senior cricket journalist for Prothom Alo English and a familiar face on T Sports, Bangladesh's leading sports broadcaster. A graduate of the University of Dhaka, she has been at the forefront of covering Bangladesh women's cricket, from their historic Asia Cup triumph to their growing presence in ICC global events. Her reporting goes beyond match scores to illuminate the systemic challenges facing female cricketers in South Asia, the rise of private investment in women’s sport, and the power of grassroots cricket in rural Bangladesh. Jahan is also a passionate advocate for gender-inclusive sports media and regularly conducts workshops for aspiring young female journalists. Her commentary style blends tactical insight with human-interest storytelling, making her a trusted voice for both traditional audiences and the new generation of cricket fans.