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IPL Chair Issues ‘Football’ Culture As Biggest Threat To Cricket’s Future

Nusrat Jahan · · 1 min read
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क्रिकेट के भविष्य पर मंडराता खतरा: अरुण धूमल की चेतावनी

आईपीएल (IPL) के चेयरमैन अरुण धूमल ने खेल जगत को एक बड़ा संकेत दिया है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने इस बात पर चिंता जताई है कि यदि फ्रैंचाइज़ी आधारित लीग्स का विस्तार बिना किसी नियंत्रण के होता रहा, तो क्रिकेट का भविष्य फुटबॉल की तरह ‘क्लब-फर्स्ट’ मॉडल में बदल सकता है। यह बदलाव खेल के पारंपरिक स्वरूप के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है।

फुटबॉल जैसा मॉडल और क्रिकेट का भविष्य

फुटबॉल में क्लब प्रतियोगिताओं जैसे इंग्लिश प्रीमियर लीग और यूईएफए चैंपियंस लीग का महत्व अंतरराष्ट्रीय मैचों से कहीं अधिक हो गया है। खिलाड़ी अपने राष्ट्रीय कर्तव्यों की तुलना में क्लब अनुबंधों को प्राथमिकता देते हैं। अरुण धूमल के अनुसार, क्रिकेट भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। आज आईपीएल जैसे टूर्नामेंट्स खिलाड़ियों को वह वित्तीय सुरक्षा और ग्लैमर प्रदान कर रहे हैं, जो द्विपक्षीय अंतरराष्ट्रीय श्रृंखलाओं में मिलना कठिन है।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए चुनौती

धूमल ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय द्विपक्षीय सीरीज, विशेष रूप से टेस्ट क्रिकेट, इस बदलाव के कारण सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “मैं अभी भी मानता हूँ कि टेस्ट क्रिकेट के लिए प्रशंसकों में बहुत प्यार है। हालांकि, हमें यह समझना होगा कि भविष्य में हमें इसे कैसे संतुलित करना है। ब्रॉडकास्टर्स और प्रशंसक खेल का मुख्य हिस्सा हैं, और अगर उनकी प्राथमिकता फ्रैंचाइज़ी क्रिकेट की ओर झुकती है, तो हमें उसके लिए तैयार रहना होगा।”

वित्तीय दबाव और बदलता परिदृश्य

आईपीएल चेयरमैन ने खेल के पीछे के आर्थिक पहलुओं पर भी प्रकाश डाला। उनके अनुसार, ब्रॉडकास्टर्स और अन्य हितधारक उस खेल को प्राथमिकता देते हैं जो आर्थिक रूप से टिकाऊ हो। कोविड-19 के दौर के बाद से, पूरी दुनिया में क्रिकेट लीग्स की बाढ़ आ गई है। एसए20 (SA20), द हंड्रेड (The Hundred) और मेजर लीग क्रिकेट जैसी प्रतियोगिताओं ने खिलाड़ियों के सामने नए विकल्प खोल दिए हैं।

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टेस्ट क्रिकेट का भविष्य क्या है?

धूमल की सबसे बड़ी चिंता यह है कि टेस्ट क्रिकेट को लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। टेस्ट सीरीज कई हफ्तों तक चलती है और शारीरिक रूप से बेहद कठिन होती है। इसके विपरीत, टी20 लीग्स कम समय में अधिक पैसा और मनोरंजन प्रदान करती हैं। यदि शीर्ष खिलाड़ी अपनी राष्ट्रीय टीम से पहले लीग्स को चुनते हैं, तो बोर्ड्स के पास टेस्ट मैचों की संख्या कम करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

निष्कर्ष: एक नया दौर

अरुण धूमल का यह बयान कोई निराशाजनक भविष्यवाणी नहीं, बल्कि क्रिकेट प्रशासकों के लिए एक चेतावनी है। यद्यपि क्रिकेट फुटबॉल जैसा नहीं बनेगा क्योंकि आईसीसी विश्व कप और प्रतिष्ठित टेस्ट प्रतिद्वंद्विताएं (जैसे एशेज) अभी भी वैश्विक स्तर पर अपना आकर्षण बनाए हुए हैं, लेकिन शक्ति का संतुलन निश्चित रूप से बदल रहा है। अब समय आ गया है कि क्रिकेट जगत आने वाली चुनौतियों के लिए अपनी रणनीति तैयार करे ताकि टेस्ट क्रिकेट जैसे खेल के पुराने और महान स्वरूप को जीवित रखा जा सके।

क्रिकेट का भविष्य अब इस बात पर निर्भर करेगा कि खेल के नीति-निर्माता फ्रैंचाइज़ी लीग्स के बढ़ते प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की गरिमा के बीच कैसे सामंजस्य बिठाते हैं।

Nusrat Jahan

Nusrat Jahan is a senior cricket journalist for Prothom Alo English and a familiar face on T Sports, Bangladesh's leading sports broadcaster. A graduate of the University of Dhaka, she has been at the forefront of covering Bangladesh women's cricket, from their historic Asia Cup triumph to their growing presence in ICC global events. Her reporting goes beyond match scores to illuminate the systemic challenges facing female cricketers in South Asia, the rise of private investment in women’s sport, and the power of grassroots cricket in rural Bangladesh. Jahan is also a passionate advocate for gender-inclusive sports media and regularly conducts workshops for aspiring young female journalists. Her commentary style blends tactical insight with human-interest storytelling, making her a trusted voice for both traditional audiences and the new generation of cricket fans.