Out of the ordinary: Amanda-Jade Wellington adjusts to a new ‘normal’
एक असाधारण वापसी की कहानी
जब अमांडा-जेड वेलिंगटन एक ‘नए सामान्य’ (new normal) के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश कर रही थीं, तब उन्होंने कुछ ऐसा कर दिखाया जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया। उनकी हंसमुख और ऊर्जावान छवि के पीछे एक संघर्षपूर्ण जीवन छिपा था। वेलिंगटन ने हाल ही में खुलासा किया कि वह लंबे समय से SVT (supraventricular tachycardia) नामक स्थिति से जूझ रही थीं। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें हृदय की विद्युत संकेतों में खराबी के कारण दिल की धड़कन अचानक बहुत तेज हो जाती है।
सर्जरी और नई शुरुआत
इस स्थिति के उपचार के लिए ‘एब्लेशन’ (ablation) प्रक्रिया अपनाई गई। इसमें कैथेटर के जरिए दिल तक पहुंचकर गर्मी या ठंडक का उपयोग करके उन हिस्सों को ठीक किया जाता है जो गलत संकेत पैदा कर रहे थे। सर्जरी के मात्र तीन महीने बाद ही, हैम्पशायर की ओर से खेलते हुए इस ऑस्ट्रेलियाई लेग-स्पिनर ने वाइटैलिटी ब्लास्ट में एसेक्स के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी पहली हैट्रिक ली और पांच विकेट झटके।
वेलिंगटन ने दिसंबर में हैम्पशायर के साथ अनुबंध किया था। मार्च में अपनी सर्जरी की घोषणा करने के बाद, अप्रैल की शुरुआत तक वह साउथम्पटन की ठंडी परिस्थितियों में अभ्यास के लिए तैयार थीं। उनके आंकड़ों में भी यह सुधार स्पष्ट दिखता है, जहाँ उन्होंने टी20 ब्लास्ट के एक ही मैच में अपने विकेटों की संख्या दोगुनी कर ली।
हृदय की धड़कन का नया एहसास
वेलिंगटन बताती हैं, ‘मैं वास्तव में बहुत अच्छा महसूस कर रही हूँ। अब मैं अपने दिल की धड़कन को पूरी तरह से अलग महसूस कर सकती हूँ। यह अजीब है, लेकिन अब मैं इसे सामान्य रूप से धड़कते हुए महसूस कर पा रही हूँ, जो मेरे लिए पहले सामान्य नहीं था।’ सर्जरी से पहले का समय उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था, जिसमें उन्हें अपने जीवनसाथी के साथ कठिन बातचीत भी करनी पड़ी थी।
अपनी टीम के सहयोग को याद करते हुए वह कहती हैं, ‘जब मुझे सर्जरी के बारे में पता चला, तो मैं टूट गई थी। मेरी टीम की साथी खिलाड़ियों ने मुझे सहारा दिया। एक सुरक्षित वातावरण मिलना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी।’ हैम्पशायर टीम के साथ भी उन्हें बहुत प्यार और समर्थन मिला है।
भविष्य की राह
वर्तमान में, वेलिंगटन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर हैं, लेकिन वह खेल के प्रति अपने जुनून को कम नहीं होने दे रही हैं। उनका मानना है कि प्रोफेशनल क्रिकेट में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और वह सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ रही हैं। उनका लक्ष्य 38-40 वर्ष की आयु तक लेग-स्पिन गेंदबाजी जारी रखना है।
क्रिकेट के बाद भी, वह खेल के साथ जुड़े रहना चाहती हैं। कमेंट्री और स्पिन कोचिंग में उनकी रुचि है। वह कहती हैं, ‘क्रिकेट मेरा जीवन है और मैं कभी भी इस खेल से दूर होने की कल्पना नहीं कर सकती।’ वेलिंगटन की यह यात्रा न केवल शारीरिक स्वास्थ्य की बहाली की है, बल्कि मानसिक दृढ़ता और खेल के प्रति अटूट प्रेम का भी प्रमाण है। उनकी यह वापसी निश्चित रूप से खेल जगत के लिए एक प्रेरणा है।