News

Bhutan’s Ritshi Choden becomes first women cricketer to be timed out – भूटान की रित्शी चोडेन महिला क्रिकेट में ‘टाइम आउट’ होने वाली पहली खिलाड़ी बनीं

Arsalan Qureshi · · 1 min read
326758.6

भूटान की रित्शी चोडेन महिला क्रिकेट में ‘टाइम आउट’ होने वाली पहली खिलाड़ी बनीं

भूटान की रित्शी चोडेन ने महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ‘टाइम आउट’ होने वाली पहली बल्लेबाज के रूप में इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया। यह घटना नेपाल के खिलाफ एक टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान हुई, जब चोडेन को क्रीज पर पहुंचने में 90 सेकंड से अधिक का समय लगा। नेपाल के फील्डरों ने अपील की, जिसे अंपायर सुन मेंग याओ और अंकिता गुहा ने बरकरार रखा। इस निर्णय ने क्रिकेट जगत में एक नई बहस छेड़ दी, क्योंकि क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ नेपाल (CAN) ने बाद में इस फैसले के लिए माफी मांगी। CAN ने स्वीकार किया कि हालांकि यह बर्खास्तगी नियमों के तहत वैध थी, लेकिन यह “खेल की भावना” को प्रतिबिंबित नहीं करती थी। यह घटना मलेशिया के मैन्टिन में ACC प्रीमियर कप के पहले मैच के चेज़ के पहले गेंद पर हुई।

मैच के दौरान की घटना का विस्तृत विवरण

मैच में ओपनर नगावांग चोडेन गोल्डन डक पर आउट हो गईं और अगली बल्लेबाज रित्शी चोडेन संभवतः तैयार नहीं थीं। मैदान पर पहुंचते ही चोडेन अपने हाथों में दस्ताने और हेलमेट पकड़े हुए धीमी गति से जॉगिंग करती हुई आईं। उन्होंने स्क्वायर-लेग अंपायर से भी कुछ देर बात की। इसी बीच, नेपाल के फील्डरों ने इकट्ठा होकर अपनी बाहें उठाईं और टाइम आउट की अपील की। नेपाल की बल्लेबाज पूजा महतो ने अंपायर से बात करने के लिए दौड़ लगाई और जश्न मनाना शुरू कर दिया। इसके बाद अंपायर ने चोडेन को बताया कि उन्हें आउट कर दिया गया है। चोडेन ने बिना किसी विरोध के पवेलियन की ओर प्रस्थान किया, जिससे भूटान का स्कोर एक गेंद पर बिना किसी रन के दो विकेट हो गया। यह एक असामान्य और निर्णायक क्षण था जिसने मैच की शुरुआत में ही भूटान की टीम को दबाव में ला दिया।

READ:  राशिद खान का मंत्र: खराब दिनों में भी खुद को कैसे संभालें

क्रिकेट में ‘टाइम आउट’ बर्खास्तगी के नियम

क्रिकेट में ‘टाइम आउट’ का नियम मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (MCC) के नियमों के तहत कानून 31 का हिस्सा है। इस नियम के अनुसार, एक बल्लेबाज को तब ‘टाइम आउट’ दिया जा सकता है जब वह पिछले विकेट गिरने के बाद निश्चित समय के भीतर अगली गेंद खेलने के लिए तैयार न हो या उसके साथी बल्लेबाज के आउट होने के बाद निर्धारित समय के भीतर क्रीज पर उपस्थित न हो। पुरुष टेस्ट और वनडे क्रिकेट में यह समय सीमा तीन मिनट है, जबकि टी20 अंतरराष्ट्रीय में यह 90 सेकंड है। इस नियम का उद्देश्य खेल को सुचारू रूप से और बिना किसी अनावश्यक देरी के चलाना है। रित्शी चोडेन के मामले में, चूंकि यह एक टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच था, इसलिए 90 सेकंड की समय सीमा लागू होती थी, और वह इसका पालन करने में विफल रहीं। यह पहली बार था जब महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इस नियम का प्रयोग किया गया, जिसने क्रिकेट के नियमों की कठोरता और उनके कार्यान्वयन पर एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया।

नेपाल की माफी और ‘खेल भावना’ का महत्व

मैच के बाद, नेपाल क्रिकेट एसोसिएशन (CAN) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर “भूटान क्रिकेट, संबंधित खिलाड़ी और सभी हितधारकों” से माफी मांगी। CAN ने स्वीकार किया कि यह घटना “क्रिकेट की भावना” के अनुरूप नहीं थी, जिसे वे बनाए रखने का प्रयास करते हैं। CAN ने अपने बयान में कहा, “आज के मैच के दौरान एक भूटानी बल्लेबाज को ‘टाइम आउट’ दिए जाने की घटना क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ नेपाल (CAN) द्वारा बनाए जाने वाले मूल्यों और क्रिकेट की भावना को प्रतिबिंबित नहीं करती है।” उन्होंने आगे कहा, “क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ नेपाल की ओर से, हम इस मामले में हमारी महिला राष्ट्रीय टीम के कार्यों के लिए अपनी हार्दिक माफी व्यक्त करते हैं। जबकि बर्खास्तगी क्रिकेट के कानूनों के भीतर प्रभावी थी, हम मानते हैं कि खेल की भावना लिखित कानूनों से परे है और हर समय हमारे आचरण के केंद्र में रहनी चाहिए।” यह माफी क्रिकेट समुदाय में खेल भावना के महत्व पर जोर देती है, जो नियमों के सख्ती से पालन से भी ऊपर है और निष्पक्ष खेल की आवश्यकता को दर्शाती है।

READ:  IPL 2026: ऑरेंज कैप की रेस में वैभव सूर्यवंशी ने मचाया धमाल

मैच पर प्रभाव और व्यापक निहितार्थ

रित्शी चोडेन के ‘टाइम आउट’ होने के बाद भूटान की पारी कभी गति नहीं पकड़ पाई। वे 114 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 51 रन से पीछे रह गए। इस जीत ने नेपाल को ग्रुप डी में शीर्ष पर पहुंचा दिया, जिसमें उन्होंने अपने दोनों मैचों में जीत हासिल की। वहीं, भूटान दो मैचों में कोई जीत न मिलने के कारण तीसरे स्थान पर रहा। यह घटना न केवल मैच के परिणाम पर बल्कि क्रिकेट के भविष्य पर भी दूरगामी प्रभाव डाल सकती है। यह सभी टीमों और खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है कि उन्हें न केवल नियमों का पालन करना चाहिए बल्कि खेल की भावना का भी सम्मान करना चाहिए। ‘टाइम आउट’ जैसे नियम का प्रयोग दुर्लभ होता है, लेकिन जब ऐसा होता है, तो यह खेल के मूल्यों और नैतिकता पर बहस छेड़ देता है। यह घटना दर्शाती है कि क्रिकेट में सिर्फ नियमों का अक्षरशः पालन ही नहीं, बल्कि ‘खेल भावना’ भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

‘टाइम आउट’ बर्खास्तगी का ऐतिहासिक संदर्भ

‘टाइम आउट’ बर्खास्तगी क्रिकेट के इतिहास में बेहद दुर्लभ है। पुरुष टेस्ट क्रिकेट में भी अब तक केवल कुछ ही बार ऐसा हुआ है। हाल ही में, एंजेलो मैथ्यूज पुरुष टेस्ट क्रिकेट में ‘टाइम आउट’ होने वाले पहले बल्लेबाज बने थे, जिसने वैश्विक सुर्खियां बटोरी थीं। महिला क्रिकेट में रित्शी चोडेन का यह पहला ‘टाइम आउट’ होना इस घटना को और भी महत्वपूर्ण बना देता है। यह दर्शाता है कि खेल के नियम सभी स्तरों पर लागू होते हैं, लेकिन उनका कार्यान्वयन हमेशा ‘खेल भावना’ के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। यह घटना खिलाड़ियों को समय पर तैयार रहने और अंपायरों को अपने निर्णयों में विवेक का उपयोग करने की याद दिलाती है, खासकर जब खेल की अखंडता और भावना दांव पर हो। यह एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जो दर्शाता है कि क्रिकेट में नियमों का पालन और खेल भावना के बीच एक नाजुक संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

READ:  पाकिस्तान बनाम बांग्लादेश: दूसरे टेस्ट में बाबर आजम की वापसी, टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला
Arsalan Qureshi

Arsalan Qureshi is one of Pakistan’s most distinctive cricket voices, serving as a senior analyst and bilingual commentator for Geo Super and a columnist for The News International. A Karachi native and graduate of the University of Karachi, Qureshi spent his early years absorbing the city’s famous fast-bowling culture before turning to the microphone. Known for his intricate breakdowns of reverse swing mechanics and his uncompromising, conversational tone, he resonates equally with Test-match purists and PSL fans. He has called multiple editions of the Pakistan Super League, bilateral series against England and Australia, and was part of the official commentary team for the 2023 Asia Cup. His columns and on-air segments are defined by a rare balance of old-school Karachi candour and modern analytical rigour.