IPL में खिलाड़ियों के वर्कलोड पर BCCI का बड़ा बयान, हस्तक्षेप से किया इनकार
आईपीएल 2026: चोटों और वर्कलोड पर बीसीसीआई की दो टूक
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के दौरान खिलाड़ियों की फिटनेस का मुद्दा हमेशा से ही चर्चा का विषय रहा है। हाल ही में कोलकाता नाइट राइडर्स के स्पिनर वरुण चक्रवर्ती की चोट की खबरों ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है। इस बीच, बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि बोर्ड आईपीएल के दौरान फ्रेंचाइजी के खिलाड़ियों के वर्कलोड और गेंदबाजी की निगरानी में सीधे तौर पर हस्तक्षेप नहीं करेगा।
वरुण चक्रवर्ती और अन्य खिलाड़ियों का मामला
आईपीएल में खिलाड़ियों का चोटिल होकर खेलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन वरुण चक्रवर्ती का मामला चिंता का विषय बना हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 3 मई को सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैच के दौरान उनके बाएं पैर के अंगूठे में हेयरलाइन फ्रैक्चर हुआ था। बावजूद इसके, वे टीम के लिए खेलते रहे। हालांकि, 13 मई को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ वे मैदान पर नहीं उतरे, लेकिन स्टेडियम में उन्हें लंगड़ाते हुए देखा गया, जो उनकी फिटनेस पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सिर्फ वरुण ही नहीं, अन्य खिलाड़ी भी शारीरिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। पंजाब किंग्स के हेड ऑफ स्पोर्ट्स साइंस एंड्रयू लीपुस ने खुलासा किया था कि अर्शदीप सिंह कुछ शारीरिक प्रतिबंधों के कारण अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, पिछले महीने मुंबई इंडियंस के मुख्य कोच महेला जयवर्धने ने भी माना था कि जसप्रीत बुमराह छोटी चोटों के बावजूद खेल रहे हैं, जिसका असर उनके प्रदर्शन पर पड़ा है।
बीसीसीआई का आधिकारिक रुख
टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत में बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि बोर्ड हर मामले में दखल नहीं दे सकता। उन्होंने कहा, ‘हम आईपीएल में खिलाड़ियों के वर्कलोड और फिटनेस को नियंत्रित करने की कोशिश करके फ्रेंचाइजी के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकते।’
सैकिया ने बताया कि आईपीएल के दौरान खिलाड़ियों की जिम्मेदारी पूरी तरह से संबंधित फ्रेंचाइजी की होती है। हालांकि, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) केंद्रीय रूप से अनुबंधित खिलाड़ियों की स्थिति पर नजर रखता है, लेकिन टूर्नामेंट के बीच में बोर्ड के पास सीमित शक्तियां होती हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि जब बात भारतीय टीम के चयन की आती है, तो बीसीसीआई फिटनेस को प्राथमिकता देती है और पूरी सावधानी बरतती है।
टीम चयन में फिटनेस को प्राथमिकता
बीसीसीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि फ्रेंचाइजी को भले ही निर्णय लेने की स्वतंत्रता हो, लेकिन राष्ट्रीय चयन के लिए फिटनेस ही सबसे बड़ा पैमाना है। यही कारण है कि आगामी श्रृंखलाओं के लिए टीम चुनते समय खिलाड़ियों की फिटनेस रिपोर्ट को बारीकी से देखा गया है।
- रविंद्र जडेजा: आईपीएल के दौरान कुछ मैच मिस करने और फिटनेस समस्याओं के कारण उन्हें टीम में शामिल नहीं किया गया है।
- मोहम्मद शमी: चयनकर्ताओं को विश्वास नहीं था कि वे एक दिन में चार ओवर से अधिक गेंदबाजी करने के लिए पूरी तरह फिट हैं, इसलिए उन्हें टीम से बाहर रखा गया।
- रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या: इन खिलाड़ियों को फिटनेस के अधीन वनडे टीम में जगह दी गई है, क्योंकि दोनों ही आईपीएल के दौरान चोटों से जूझ रहे हैं।
अंत में, यह स्पष्ट है कि बीसीसीआई और फ्रेंचाइजी के बीच की यह कार्य-संस्कृति आने वाले समय में खिलाड़ियों के स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए एक नई बहस को जन्म देगी। प्रशंसकों के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि खिलाड़ी अपनी फिटनेस और फ्रेंचाइजी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के बीच कैसे संतुलन बनाए रखते हैं।